आपत्ति नंबर 7
क़ुरआन सूरह बकरा
आयत : 22
जिसने तुम्हारे वास्ते जमीन को बिछौना और आसमान की छत बनायी ।
( आयत - 22 )
आपत्ति - 7
भला आसमान छत किसी की हो सकती है ? यह अज्ञानता की बात है आसमान को छत की भान्ति मानना उपहास की बात है यदि किसी और ग्रह की धरती का आसमान मानते हों तो उनके घर की बात है ।
आपत्ति का जवाब
आसमान नीला छत की भान्ति नजर आ रहा है अरबी में हर ऊची वस्तु को जो सर से ऊपर हो सकफ कहा करते हैं । इसी आधार पर आसमान को सकफ (छत) कहा गया । स्वामी जी की बला को क्या पड़ी थी कि ऐसी तहकीक करते और उनको अपने मामूली मसखरे पन से समय भी नहीं था बाकी न0 18 में देखो।
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