आपत्ति नंबर 15
क़ुरआन सूरह बक़रह
आयत : 73
इस तरह खुदा मुर्दो को जीवित करता है और तुम को अपनी निशानियां दिखाता है ताकि तुम समझो ।
(आयत : 73)
आपत्ति - 15
यदि मुर्दो को ईश्वर जीवित करता था तो अब क्यों नहीं करता ? क्या वह कयामत की रात तक कब्रस्तान में पड़े रहेंगे ? क्या आजकल दौरा सुपुर्द है ? क्या इतनी ही अल्लाह की निशानियां हैं । क्या धरती, सूरज, चांद आदि निशानियां नहीं हैं ? क्या कायनात में जो भिन्न भिन्न प्रकार के प्राणी नजर आते हैं । यह कोई कम निशानियां हैं ?
आपत्ति का जवाब
इस आयत का अनुवाद जो आपने लिखा है गलत है । सही अनुवाद यह है।
इसी तरह ईश्वर मुर्दो को जीवित करेगा।
अतएव शाह अब्दुल कादिर साहब ने अनुवाद यूं किया है ।
इसी तरह ईश्वर जिला देगा मुर्दे ।
तो आपका हर सवाल सिरे से गलत हो गया । जो बिगाड़ का आधार फैलाने वाला था आज कल दौरे सुपुर्द नहीं बल्कि इनाम व दंड भुगत रहा है आपने कुरआन पढा होता तो आप को मालूम होता । सुनिए
फ़िरऔन और उसके आज्ञा पालक के पक्ष में फ़रमाया (सुबह व शाम फिरऔनियों को आग पर पेश किया जाता है) कियामत में ऐसे ही शरीरों के साथ उठेंगे जैसे शरीरों के साथ वे दुनिया में जीते थे वर्ना इनाम व दंड तो मरते ही आरंभ हो जाता है ।
(यासीन : 26-27)
निस्सन्देह सारी कायनात ईश्वर की प्रकृति की निशानियां हैं । देखिए अल्लाह फ़रमाता है । (जार्रियात - 20)
लेकिन स्वामी जी ! आयत में किस निशानी का नाम लिया है और किसका इन्कार किया है जो आप यह आपत्ति करने बैठ गए ।
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