आपत्ति

Saturday, 30 May 2020

आपत्ति नंबर 11
क़ुरआन सूरह बक़रह
आयत : 34
जब हमने फ़रिश्तों से कहा सज्दा करो आदमी को तो सबने सज्दा किया पर शैतान ने न माना और घमंड किया क्योंकि वह भी एक काफिर था ।
(आयत : 34) 
आपत्ति - 11

इससे साबित हुआ कि ईश्वर सर्वज्ञाता नहीं अर्थात अतीत, वर्तमान और भविष्य की बातें पूरे तौर पर नहीं जानता तो शैतान को पैदा ही क्यों किया ? और ईश्वर में कुछ प्रताप व तेज भी नहीं है क्योंकि शैतान ने उसका आदेश ही न माना और ईश्वर उसका कुछ भी न कर सका और देखिए एक काफ़िर शैतान ने ईश्वर के भी छक्के छुड़ा दिए । मुसलमानों की नज़र में जहां करोड़ों काफिर है । वहां मुसलमानों के खुदा और मुसलमानों की थोड़ी बहुत चल सकती है ? कभी कभी ईश्वर भी किसी की बीमारी बढ़ा देता है और किसी को । भटका देता है । ईश्वर ने यह बातें शैतान से सीखी होगी और शैतान ने ईश्वर से । क्योंकि सिवाए ईश्वर के शैतान का उस्ताद और कोई नहीं, हो सकता । 

आपत्ति का जवाब

भोले पंडित जी ! किस आयत से मालूम हुआ कि खुदा को पता नहीं । यदि शैतान के पैदा करने से ईश्वर बे इल्म साबित होता है तो परमेश्वर ने जैनियों को क्यों पैदा किया ? जो आपके कथनानुसार मूर्ति पूजा को आरंभ करने वाले हुए जिनके बारे में सत्यार्थ प्रकाश में आप लिखते हैं ।
   
मूर्ति पूजा का जितना झगड़ा चला है वह सब जैनियों के घर से निकला है और पाखन्डियों की जड़ यही जैन धर्म है।

और सुनिए - ईश्वर ने गाजी महमूद को क्यों पैदा किया जिसने आर्यव्रत की काया पलट दी ? और बताइए ईश्वर ने पुरानों के लेखकों को क्यों पैदा किया जिन्होंने (आपके कथनानुसार) सारे पुरान गप्पों से भरकर आर्यव्रत को गुमराह कर दिया । 
और सुनिए . . . . . . . ईश्वर ने मुसलमान क्यों बनाए कि वेदिक धर्म का सारा ताना बाना ही बिखर कर रह गया । जब आप इन सवालों के जवाब देंगे तो हम भी बताएंगे कि शैतान को क्यों पैदा किया ? 

असल बात यह है कि शैतान किसी की गुमराही के लिए कोई तर्क या कारण नहीं है बल्कि वह केवल एक बुरे सलाहकार की तरह बुरे विचारों और कामों का सुझाव देने वाला और लुभाने वाला है । अतएव उसका यह बयान पूरे का पूरा कुरआन में मौजूद है तनिक ध्यान से सुनिए ।

 
मेरा तुम पर जोर न था मैंने केवल तुमको बुलाया था । तुमने कुबूल कर लिया ।
(सूरह इब्राहीम 22)

जैसे दुनिया में और बहुत सी बुरी संगतें होती हैं ऐसे ही शैतान भी एक बुरा साथी है इससे अधिक कुछ नहीं । इस बुरी संगत के प्रभाव से बचने के लिए ईश्वर ने एक इलाज बताया है बड़ा ही शक्ति शाली जो हकीकत में बड़ा प्रभावी है वह है अल्लाह का जिक्र (गुण गान करना) अतएव क़ुरआन में इसका भी उल्लेख है - अर्थात 
ईश्वर के भले बन्दों पर शैतान का कोई दावं नहीं चल सकता । जो लोग अल्लाह के जिक्र में समय गुजारते हैं । और बुरे कामों से बचते हैं शैतान उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता । हां जो लोग बेहूदा बकवास और बुरी संगत में समय नष्ट करते हैं उन्हीं पर शैतान अपना जोर चला पाता है।
 (सूरह हिज्र)

(सत्यार्थ प्रकाश पृष्ठ 541 को ज़रा ध्यान से पढ़े) अतः शैतान का उदाहरण बिल्कुल विष का सा समझो । जैसा कि ईश्वर ने विष पैदा करके उसका इलाज भी बता दिया है । ऐसा ही शैतान पैदा करके उसका प्रभाव बताकर इलाज (तौबा और रसूल का अनुसरण) बता दिया है । शैतान की विस्तार से बहस की जानकारी के लिए तफसीर सनाई भाग 1 हाशिया खतमुल्लाह में देखें । 
हां याद आया कि दुनिया में इस समय करोड़ों मुसलमान, करोड़ों ईसाई, बौद्ध, यहूदी आदि कौमें ईश्वर के ज्ञान (वेद) को नहीं मानते बल्कि उसे मूर्ति का स्त्रोत जानते हैं तो परमेश्वर कैसा विवश हैं कि इनको सीधा नहीं कर सकता । उसके तेज में कोई फर्क तो है । आखिर किस किस से बिगाड़े और किस किस को पकड़े ? | 
स्वामी जी ! जीव आत्मा अपनी इच्छा की मालिक है (देखो सत्यार्थ प्रकाश , अध्याय 7 - पृष्ठ 48) धार्मिक मामलों में ईश्वर ने छूट दी हुई है जिसका जी चाहे आज्ञा पालक हो जो चाहे न हो, सुनो ! कुरआन मजीद बताता है । 
जो चाहे ईमान लाए और जो चाहे काफ़िर बने।
(सूरह कहफ़ - 29)
अतः एक शैतान क्या सामान्यता दुनिया के सारे काफिर इस समय खुदा की किताब पर मुंह चिढ़ाते हैं मगर वह सब को सुख शान्ति और आराम देता है लेकिन बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी खुदा के गुमराह करने और बाकी शैतानी बातों के जवाब नंबर 6 में देखो ।

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