Wednesday, 27 May 2020

आपत्ति नंबर 9
क़ुरआन सूरह बकरा
आयत : 25
और शुभ सूचना दे उन लोगों को कि ईमान लाए और काम किए अच्छे यह कि वास्ते उनके जन्नत हैं बहती हैं नीचे से नहरें । जब दिए जाएंगे उसमें से मेवों से अजीविका खाएगे । यह वह चीज है जो दिए गए थे हम पहले उससे और वारते उनके पत्नियां हैं सुथरी और सदैव वहां रहने वाली हैं ।
(आयत: 25)
आपत्ति - 9 

भला इस कुरआन की जन्नत में दुनिया से बढ़कर कौन सी अच्छी वस्तु हैं ? जो वस्तुएं दुनिया में हैं वही मुसलमानों की जन्नत में हैं और इतनी अधिक हैं कि यहां जैसे आदमी मरते हैं और पैदा होते और आते जाते हैं इसी तरह जन्नत में नहीं मगर यहा औरतें सदैव नहीं रहतीं और वहा बीबियां सदैव रहती हैं । जब तक कयामत की रात_1 न आएगी तब तक उन बेचारियों के दिन किस प्रकार गुजरते होंगे, हा ईश्वर की उनपर कृपा होती होगी और ईश्वर के सहारे समय गुजारती होंगी । यही ठीक हो सकता है मुसलमानों की जन्नत यद्यपि कलिए गोसाइयों के गोलोक मन्दिर की तरह मालूम होती है जहां कि औरतों का आदर सम्मान बहुत अधिक है आदमियों का_2 नहीं । इसी प्रकार ईश्वर के घर में औरतों का महत्व है और उनसे ईश्वर की मुहब्बत भी पुरूषों के मुकाबले अधिक है क्योंकि ईश्वर ने बीवियों को जन्नत में सदैव के लिए रखा है न कि पुरुषों को । वे बीबियां बिना ईश्वर की इच्छा व अनुमति जन्नत में कैसे ठहर सकती हैं ? यदि यही बात है तो ईश्वर भी औरतों में उलझा हुआ है ।

आपत्ति का जवाब

स्वामी जी ! जिस कलाम को आदमी न समझे उस पर आपत्ति करने से नदामत होती है । आप स्वयं भूमिका में गैर धर्म पर सोच विचार अत्यन्त आवश्यक बता आए हैं क्या वह औरों के लिए है आपके लिए नहीं ? हम ने तो जितनी आपत्तियां आपकी देखी हैं उनसे यही साबित होता है कि आप स्वयं इस उसूल का अपवाद हैं । जन्नत में सब कुछ आराम और हर प्रकार के सुख वैभव (परन्तु सभ्य तरीके का) के सामान अल्लाह की ओर से होंगे । आप उसे दुनिया का सा समझते है क्या आपने गुरू नानक जी का कथन भी नहीं सुना . . . . . . "नानक दुखया सब संसार” फिर आम दुनिया को जन्नत की तरह समझें तो इसमें किसकी गलती है ? 

स्वामी जी ! दुनिया में कोई व्यक्ति भी किसी हालत में सुखी और ऐशो आराम में नहीं हो सकता । कोई न कोई दुख, कष्ट उसे लगा ही रहता है । माल से हो सन्तान से हो , दोस्तों से हो या शत्रुओं से हो, शारीरिक हो या आध्यात्मिक, मगर जन्नत में पूरी तरह सुख ही, सुख होगा । सुनो 
"न जन्नत में कोई तकलीफ होगी और न उससे बाहर किए जाएंगे।" 
(सूरह हिज्र - 48) 

उन बेचारियों की चिंता तो जब करते कि कुरआन की किसी आयत से दिखाते कि वे अभी से पैदा भी हो चुकी हैं और पतियों की चाहत में व्याकुल हैं । 
स्वामी जी ! झूठ बोलना हर धर्म में बुरा है । पुरूषों से महिलाओं का कम महत्व कौन सी आयत से आपने समझा है इसी ज्ञान के बल पर आप स्वामी बने हैं कि आपको इतनी भी खबर नहीं कि कुरआन में पुल्लिंग का कालिमा आया है अर्थात "खालिदून" जिसका अर्थ है नेक मर्द सदैव जन्नत में रहने वाले होंगे । आपको किसी ने "वाले'' का शब्द "वाली" करके सुनाया तो आपके कान में वाली (बाली) पड़ गयी । अफ़सोस आप के सारे धार्मिक ज्ञान की पोल खुल गयी । कुरआन के मुहावरे में औरतें मर्दो के आदेश के तहत होती हैं अर्थात जो आदेश या हुक्म मर्दो को होता है वह औरतों को भी होता है उसके सिवा जो खास किया जाए ।

  1.  यह शब्द नहीं मालूम स्वामी जी को किस ने सिखा दिया है हर जगह यही बोलते हैं । 
  2. उर्दू जानने वाले सज्जन औरत और आदमी का मुक़ाबला ध्यान से देखें । 

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