Tuesday, 26 May 2020

आपत्ति नंबर 8
क़ुरआन सूरह बक़रह
आयत : 23-24
जो तुम इस वस्तु से सन्देह में हो जो हमने अपने सन्देष्टा के ऊपर उतारी तो इस जैसी एक सूरह के और अपने मददगारों को पुकारो सिवाए अल्लाह के यदि हो तुम सच्चे और कदापि न करोगे तुम उस आग से डरो कि जिसका इंधन आदमी हैं और काफिरों के लिए पत्थर_1 तैयार किए गए हैं ।
(आयत : 23-24) 

आपत्ति - 8

भला यह कोई बात है कि उसके जैसी कोई सूरह न बने ? क्या अकबर बादशाह के जमाने में मौलवी फैजी ने बे बिन्दू (नुक्ता) का कुरआन नहीं तैयार किया था । वह कौन से जहन्नम की आग है ? क्या इस दुनिया की आग से न डरना चाहिए । इस आग में भी जो कुछ पड़े वह उसका ईंधन है जैसे कुरआन में लिखा है कि काफिरों के लिए पत्थर तैयार किए गए हैं वैसे पुरानों में लिखा है किमलीछों के लिए घोर नरक बना है । अब कहिए किस की सच्ची मानें ? अपने कथनों से तो दोनों स्वर्ग में जाने वाले हैं और एक दूसरे के धर्म के अनुसार दोनों जहन्नमी होते हैं अतः इन सबका झगड़ा झूठा है हां जो धार्मिक हैं वे सुख और जो पापी हैं वे दुख पाएंगे । यह सारे धर्मों का मानना हैं । 

आपत्ति का जवाब 

शोध कर्ता व आपत्ति कर्ता को यह तो खबर नहीं कि बे बिन्दू वाक्य क्या होता है और उत्तम शैली क्या है । उन्होंने सुन लिया कि फ़ैज़ी ने बिना बिन्दू (नुक्ता) की टीका लिखी थी तो वे समझे कुरआन का मुकाबला हो गया । भला स्वामी जी ! यदि फैजी की टीका कुरआन की भान्ति बे मिसाल होती तो पहले फैजी ही को क्यों कुरआन के बारे में सन्देह न होता और वह क्यों इस घमंड में इस्लाम से विमुख न होता कि मैंने कुरआन की जैसी किताब लिख डाली है बस आपके जवाब में यही काफी है । आप मालिक हैं आप इस आग से भी डरें । कौन आप को कहता है कि न डरें । बात तो केवल यह है कि जहन्नम की आग चूंकि बहु देव वादियों और हठ धर्मियों की सजा है इसलिए उससे डरने का यह अर्थ है कि ऐसे काम छोड़ दो । यह स्वामी जी की जानकारी है । लिखते हैं कि कुरआन में काफिरों के लिए पत्थर तैयार किए गए हैं । आगे भी कई जगह स्वामी जी ने अपनी योग्यता का सबूत दिया है । जरा सोच विचार करो तो यह इस्लाम का चमत्कार है कि आप जैसे ज्ञानी भी ऐसी बहकी बहकी बातें करने लग जाते हैं । यदि क़ुरआन और पुरान की बातों पर अमल करने वाले अपने अपने कथनों से जन्नती हैं तो आप दोनों के कथनों से जहन्नमी ही होते हैं स्वामी जी ! अपनी चिन्ता कीजिए ।

"तुझको पराई क्या पड़ी अपनी नबीड" 

देखना यह है कि दोनों में से कौन हक पर है तो उसकी पहचान कीजिए बाकी बातों से क्या लाभ ? यह ठीक है कि जो पापी है वे सारे धर्मों में दुख ही पाएंगे मगर इससे अधिक पाप क्या होगा ?

"जो धर्म दूसरे धमाँ को, कि जिनके हजारों करोड़ों आदमी श्रद्धालु हों झूठा बता दे और अपने को सच्चा ज़ाहिर करे उससे बढ़कर झूठा और धर्म कौन हो सकता।
                 
(पहले पैराग्राफ की पांचवी लाइन से पढ़ें)


  1. समाजियो इस आयत का यह अनुवाद कहीं किसी ने किया हो तो हमें दिखाओ और इनाम लो ।

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