Saturday, 30 May 2020

आपत्ति नंबर 12
क़ुरआन सूरह बक़रह
आयत : 35-37
और कहा हमने ऐ आदम तू और तेरी पत्नी जन्नत में रहकर खाओ तुम आराम से घूमों जहां चाहो और मत निकट जाओ उस पेड़ के कि पापी हो जाओगे । शैतान ने उनको गुमराह किया और उनको जन्नत के सुख वैभव से खो दिया । तब हमने कहा कि उतरो तुम में कुछ तुम्हारे दुश्मन हैं और तुम्हारा ठिकाना धरती पर है और एक समय तक फायदा है अतः सीख लीं आदम ने अपने पालनहार से कुछ बातें तो वह धरती पर आ गया ।
(आयत : 35-37 ) 
आपत्ति - 12 

देखिए खुदा का अल्पज्ञान अभी तो जन्नत में रहने की दुआ दी और अभी कहा कि निकलो । यदि आगे की बातों को जानता होता तो दुआ ही क्यों देता ? और मालूम होता है कि बहकाने वाले शैतान को सजा देने से विवश भी है । वह पेड़ किसके लिए पैदा किया था ? क्या अपने लिए या दूसरे के लिए । यदि दुसरों के लिए तो क्यों आदम को रोका ? इसलिए ऐसी बातें न अल्लाह की और न उसकी बनाई हुई किताब की हो सकती हैं ।

आदम साहब ईश्वर से कितनी बातें सीख कर आए थे ? और जब धरती पर आदम साहब आए तो किस तरह से आए, क्या वह जन्नत पहाड़ पर है या आसमान पर ? इससे क्यों कर उतरे क्या पक्षी की तरह उड़कर या पत्थर की तरह गिर कर ?

यह स्पष्ट होता है कि जब आदम साहब खाक से बनाए गए तो उनकी जन्नत में खाक होगी और जितने वहां फरिश्ते आदि हैं वे भी खाक ही होंगे क्योंकि खाक के शरीर बिना अंगों के नहीं बन सकते और ख़ाकी शरीर होने के कारण मरना भी निश्चित होगा । यदि वहां मौत होती है तो वहां से मौत के बाद कहां जाते हैं ? और यदि मौत नहीं होती तो उनका जन्म भी नहीं होना चाहिए । जब जन्म है तो मौत भी जरूरी है ऐसी सूरत में कुरआन का यह लिखना कि बीवियां सदैव जन्नत में रहती हैं झूठा हो जाएगा क्योंकि उन्हें मरना भी होगा । जब यह हालत है तो जन्नत में जाने वालों की भी मौत अवश्य होगी । 

आपत्ति का जवाब

स्वामी जी ! देखिए आपका अल्पज्ञान - कि अनुमति को आप दुआ समझे बैठे हैं । ऐ साहब ! जो शब्द कुरआन में इस बारे में आया है वह सम्बोधन करने का कलिमा है जिसका अर्थ है रहों जन्नत में फिर इसी के साथ फ़रमा दिया कि उस पेड़ के निकट न जाना वर्ना तुम अवज्ञाकारी हो जाओगे जिससे स्पष्ट रूप से यह नतीजा निकलता है कि यह आदेश वैसा ही है जैसा परमेश्वर की ओर से आपको हुक्म होता है कि मैंने तुमको कर्म जूनी (अमल का घर) मानव ढांचा दिया है इसमें रहना और दुराचार व बदकारी न करना वर्ना तुम बन्दर और सुअर बनाए जाओगे । अतएव बहुत से आर्यों को वह दिन देखना नसीब होता है । कहिए क्या परमेश्वर को ज्ञान नहीं है ? जन्नत निस्संदेह किसी समतल मकान पर होगी शायद वहां ही हो जहां पर जीव आत्मा (आप ही के कथना नुसार) मुक्ति के बाद रहती है । देखो सत्यार्थ प्रकाश अध्याय न0 9

हैरत है आप पूछते हैं कि आदम को कितनी बातें सिखायीं भोले पंडित जी ! सारी बातें जिनकी मानव जाति को जरूरत है सिखाय कुरआन में 'कल्हा' का शब्द देखिए स्वामी जी के टेढ़े सवाल देखिए कि आदम जमीन पर किस प्रकाईश्वर की रक्षा में आए । यदि अधिक कुरेदो तो सुनो ।

जिस प्रकार गुब्बारे बाज़ उतर आते हैं इसी तरह भी उतरना संभव है । जज किसी अपराधी को दंड देने से तब विवश हुआ करता है कि उसके दंड का समय आ चुका हो और पकड़ न सके और यदि समय पर नहीं पहुंचा तो समय से पहले विवश कहना आपकी बुद्धि व समझ का दोष है वर्ना बताइए सुलतान महमूद गज़नवी और मुहम्मद गौरी ने इतने कम समय में उन्होंने हिन्दुस्तान की काया पलट दी । परमेश्वर ने उन्हें सजा क्यों न दी । बेशक जो खाकी (मिट्टी की) चीज़ है वह एक दिन नष्ट भी हो सकती है लेकिन यदि ईश्वर की ओर से उसकी कमी की पूर्ति होती रहे_2 और ईश्वर उसकी मौत न चाहे तो कोई जरूरी नहीं कि धींगा धेगी मर ही जाए जबकि हम देखते हैं कि कुछ आदमी एक दिन बल्कि एक सांस का जीवन बिताकर ही चल देते हैं और कुछ सौ साल से ऊपर हो जाते हैं तो यह अन्तर हमें सचेत करता है । कि उनकी मौत की तारीख परमेश्वर के हाथ में है अतः इसी तरह जन्नतियों की मौत की तारीख अल्लाह ने असीम जमाना पर डाल दी हो या बिल्कुल मौत को उनसे उठा ही दिया हो तो क्या खराबी है ? 


1 - दैनिक आहार जो खाया जाता है यह आहार मनुष्य के अंगों में मिल कर बदल बनती इसी को भी की पूर्ति करते हैं ।

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