अस्सलाम अलैकुम
आप सभी को यह जान कर बहुत खुशी होगी कि हम मौलाना सनाउल्लाह अमृतसरी रह• की किताब हक़ प्रकाश बा जवाब सत्यार्थ प्रकाश जो मौलाना ने स्वामी दयानंद की किताब सत्यार्थ प्रकाश के चौदवें समुल्लास के जवाब में लिखी थी, को अब टेक्स्ट के रूप ब्लॉग पर थोड़े से संशोधन के साथ पोस्ट किया जा रहा है।
हक़ प्रकाश बाजवाब सत्यार्थ प्रकाश किताब जो कि मौलाना सनाउल्लाह अमृतसरी साहब की लिखी हुई एक बहुत ही बेहतरीन किताब है जिन लोगों ने इसका मुताला किया है वो जानते हैं कि ये किस दर्जे की किताब है ।
इसमें हम एक विषय सूची कुछ इस तरह से बनाएंगे जिसमे आयत नंबर भी लिखा होगा जिससे जवाब खोजने वाले को परेशानी ना हो और वह आयत के अनुसार भी जवाब खोज सकें, जिस पर स्वामी दयानंद जी ने आपत्ति की है और हम उन मंत्रों को भी संशोधित करेंगे जो पाठकों को खोजने में परेशानी होती है। मंत्रों के प्रमाण जो वर्तमान में हक़ प्रकाश में दिए गए हैं वह वेदों से खोजने पर मिलते नही है तो उन्ही मंत्रों के प्रमाण को संशोधित किया जाएगा।
विषय सूची
- प्रकाशक की ओर से।
- हक प्रकाश पर एक समीक्षा
- कुछ पुस्तक के बारे में
- भूमिका
- हक प्रकाश ब जवाब सत्यार्थ प्रकाश
- कुरआन के बारे में स्वामी जी की राय
- आपत्ति कर्ता के मुकाबले में जवाब देने वाले की राय
- निष्पक्ष और भले लोगों के लिए यही गवाही काफी है।
सत्य और असत्य की जंग और आपसी कटुता का इतिहास बड़ा ही प्राचीन है बल्कि यह कहना सही होगा कि जब से इस्लाम का जन्म हुआ है उसी समय से इस पर आरोप प्रत्यारोप और तोहमतों का कार्य हो रहा है ।सत्य धर्म की शिक्षाओं को अज्ञानता , टेढी सोच , स्वार्थ , दुर्भावना और दुश्मनी व नफरत की बुनियाद पर लान तान का निशाना बनाया गया ।|नफ्स के गुलामों ने अपनी हठधर्मी के नशे में इस्लाम के तथ्यों को दुनिया के सामने संदिग्ध बना कर प्रस्तुत करने की बार बार नाकाम कोशिशें कीं ।लेकिन अल्लाह के कानून के अनुसार यथा आवश्यक्ता हर युग में ऐसे इस्लाम के बहादुर और सूरमा पैदा होते रहे जिन्होंने अपने ज्ञानात्मक , लेखों और वक्तव्यों की योग्यताओं को काम में लाकर इस्लाम और मुसलमानों पर होने वाली असत्य आपत्तियों का भरपूर जवाब दिया है जिन्होंने हर प्रकार कीसाजिशों को उखाड़ फेंका ।उनकी जबान व कलम से निकले हुए शब्द कुरआन व हदीस से शक्ति ग्रहण करके इस्लाम विरोधियों के विरोध और उनके नास्तिक एवं अधर्मवाद के झोंपड़े पर कड़क दार बिजली बन कर गिरे और उसे जलाकर भस्म कर दिया ।इसी क्रम की एक अहम कड़ी का हिस्सा यह किताब “ हक प्रकाश भी है जो आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती की किताब सत्यार्थ प्रकाश के अध्याय 14 का जवाब है जो जवान व कलम के प्रख्यात मनाजिरे इस्लाम अल्लामा अबुल वफा सनाउल्लाह 3 । अमृतसरी की प्रसिद्ध किताब है । अल्लामा सनाउल्लाह अमृतसरी १५२५ ही इस दौर के लिए बहुत ही शक्तिशाली सत्य की आवाज साबित हुए । जिस समय इस्लाम के विरुद्ध हर ओर से भ्रम एवं संदेहों की तेज आंधियां चल रही थी और नबी करीम सल्ल0 के व्यक्तित्व और आपकी पाक जात को रंगीला रसूल लिखकर दागदार बनाने की कोशिशें की जा रही थी । अब्दुल गफूर की किताब " तकें इस्लाम का सहारा लेकर इस्लाम पर कीचड़ उछालने की नापाक कोशिशें हो रही थीं । ऐसे समय में जरूरत थी एक सतर्क व दृढ जबान व कलम की और ज्ञान एवं उच्च कोटि के विद्वान की जिसके द्वारा नित नए फ़ितनों का सर कुचला जा सके और इस्लाम दुश्मन विचारों एवं दृष्टिकोणों का निवारण हो सके और इस्लाम की सुरक्षा की जा सके । अल्लामा अबुल वफा सनाउल्लाह अमृतसरी अपने दौर के महान मुजाहिद थे | वे इस्लाम दुश्मनों के लिए नंगी तलवार साबित हुए । उन्होंने समय समय पर उठने वाले फित्नों का हर मौके पर ज्ञानात्मक मुकाबला किया । ईसाइयों की आपत्तियों के जवाब , इस्लाम व मसीहियत , तकाबुल सलासा और इसी प्रकार की दूसरी किताबें अल्लामा के जिन्दा कारनामे हैं । आप इस्लाम विरोधियों से दो दो हाथ करने में कभी पीछे नहीं रहे । और इस्लाम विरोधियों से मनाजिरे करके सत्य का बोल बाला किया । | आज फिर इसी प्रकार के फितने सर उठा रहे हैं । इस्लाम दुश्मन तत्वों का इस्लाम के विरुद्ध हमला बड़ी तेजी के साथ शुरू हो गया है । नास्तिकों और आपत्ति करने वालों की ओर से इस्लाम की हकीकी शिक्षा का स्वरूप बिगाड़ने और उसके बारे में प्रोपगंडे और गलत फहमियों को बढ़ावा देने की सारी कार्रवाइयां चल रही है मीडिया व समाचार पत्रों ने इस्लाम के विरुद्ध गलत विचारों व दृष्टिकोणों का प्रचार एवं प्रसार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है । ऐसे हालात में अल्लामा सनाउल्लाह साहब की तर्क पूर्ण , शाहकार और इल्मी किताबों के प्रकाशन का महत्व बढ़ गया है । यही कारण है कि हमने इस महत्वपूर्ण किताब को हिन्दी भाषा में प्रकाशित करने का कदम उठाया है । | हमारा उद्देश्य यही है कि मुसलमान और गैर मुस्लिम भाई इस | किताब का अध्ययन करके सत्य और असत्य का फर्क जान सके और इस्लाम व पैगम्बरे इस्लाम पर निराधार लगाए गए आरोपों का सतर्क जवाब पढ़ सकें ।
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