आपत्ति

Tuesday, 2 June 2020

क्या अल्लाह भी नमाज़ पढ़ता है?

क्या अल्लाह भी नमाज़ पढ़ता है?

आज के वक़्त में इस्लाम के विरुद्ध आपत्ति करने वाले भ्रामक जानकारियाँ फैला कर अपना स्वार्थ साधना चाहते हैं और दूसरे लोगों को इस्लाम के विरुद्ध गुमराह करना चाहते हैं।

ऐसी ही एक पोस्ट हमारे पास आई जिसमे लिखा था "क्या अल्लाह भी नमाज़ पढ़ता है?"

हमने जब इसकी तहक़ीक़ की तो मालूम हुआ कि यह जानकारी एक ब्लॉग से फैलाई जा रही है और उस ब्लॉग का नाम है भंडाफोड़ू। 

वह पोस्ट क्या थी हम आपको दिखाते हैं और आप पहले वह पोस्ट पढ़ लें फिर उसका जवाब पढ़िए।


 आपत्ति

4 इमाम  अहमद  का परिचय 

इनका पूरा  नाम "अहमद  इब्न मुहम्मद इब्न  हम्बल अबू  अब्दुल्लाह अश्शेबानी - احمد بن محمد بن حنبل ابو عبد الله الشيباني‎  "  है  ,  इनका  काल ईस्वी 780–855 CE/164–241 AH,यह सुन्नियों  के हम्बली  फिरके के विद्वान्  , और  हदीसों  के ज्ञाता   थे यही नहीं  इन्हों    कई हदीसें   भी   जमा   की  थीं  ,हदीसों के इनके संकलन की किताब  का  नाम  "किताब  अल सुन्नाह   -كتاب السنة   " है  इसी किताब  में एक ऐसी बात दी गयी है  ,  जो अल्लाह के बड़े होने की पोल खोलने के लिए  काफी   है  ,देखिये  हदीस ,

5-मुहम्मद ने अल्लाह को नमाज पढ़ते देखा 

इमाम  अहमद   की "in Kitab Al Sunna by Abdullah bin Ahmad, vol.1, p.27

में लिखा   है  "जब मुहमद   मेराज (जन्नत यात्रा  ) सातवें  आसमान पर  गए तो उनका सामना  जिब्राईल  से  हुआ  ,तो उसने इशारे  से   रोका और कहा  ठहरो  अभी  अल्लाह  नमाज  पढ़  रहे   हैं  ,रसूल  ने पूछा  क्या  अल्लाह भी नमाज  पढ़ता  है   ?जिब्राइल बोलै हाँ  , अल्लाह भी नमाज पढ़ता  है . फिर  रसूल  ने पूछा  ?अल्लाह   नमाज में क्या पढ़ता  है  ?तब जिब्राइल ने  कहा  अल्लाह  कहता है ' स्वामी  की  जय   हो   !या   स्वामी  की बड़ाई  हो 

when Muhammad reached the 7th heaven during the Isra and Mi'raj, he encountered Gabriel, who immediately said “Shh! Wait, for Allah is praying (Sala).” Muhammad asked: “Does Allah pray?” to which Gabriel said, “Yes, he prays.” Muhammad then asked, “What does he pray?” and Gabriel said “Praise! Praise the Lord!"

عندما وصل محمد إلى الجنة السابعة في الإسراء والمعراج ، قابل جبرائيل ، الذي قال على الفور: "ص! انتظر ، لأن الله يصلّي (سالا). سأل محمد: "هل يصلي الله؟" الذي قال جبريل: "نعم ، يصلي." سبح الرب

كتاب السنة ـ الإمام عبد الله بن الإمام احمد-
vol.1, p.27

6-हदीस  का   वाक्य  विश्लेषण 
इस हदीस के मुख्य  वाक्यों को  हम  अलग  अलग  करके    देखते  है जिस से बात   स्पष्ट हो जाये   ,
1-मुहमद   से जिब्राइल ने कहा  " श श  प्रतीक्षा करो  , अल्लाह नमाज  पढ़   रहा  है  -""ص! انتظر ، لأن الله يصلّي-श इंतजर लि इन्नल्लाह यूसल्ली .
2-मुहम्मद  ने पूछा  क्या अल्लाह भी नमाज पढ़ता  है  ?-हल  युसल्ली  अल्लाह   "هل يصلي الله؟" 
3-जिब्राइल ने कहा  हाँ  नमाज पढ़ता  है  .नअम युसल्ली -نعم ، يصلي
4-इस बात को स्पष्ट  करते  हुए  जिब्राइल  बोला "अपने  स्वामी  की  स्तुति   करता   है  - सब्बिह अर्रब -سبح الرب

7-अल्लाह के ईमान वालों  से सवाल 

हमें  पूरा  यकीन है  कि इस  हदीस  के मुताबिक  कोई भी इमान वाला  जिब्राइल  और मुहम्मद को झूठा   कहने  की हिमाकत   नहीं  करेगा   ,  इसलिए   जो भी  मुस्लिम  इसे  पढ़े      बराये मेहरबानी  इन   सवालों  का  जवाब   दे  ,
 1.अल्लाह को नमाज पढ़ने की  जरुरत क्यों  पद  गयी  ?
2.जब  काबा  मक्का  में है ,तो अल्लाह किसकी तरफ नमाज पढ़ रहा  था  ?
3-नमाज में सूरा फातिहा  पढ़ना  जरुरी  है , जिसमे अल्लाह की तारीफ  है  , तो क्या अल्लाह  जन्नत में नमाज के अंदर अपनी  ही तारीफ  कर  रहा  था ?
4-जब  खुद  जिब्राइल ने मुहम्मद को बताया कि अल्लाह  नमाज में  'रब यानि  स्वामी की वंदना करता है  , तो अल्लाह का"  रब - الرب  " कौन  है  ?
5-और अंतिम  सवाल  है  , अगर  इस अल्लाह     या  जन्नत के अल्लाह  का भी कोई  स्वामी   या रब है  तो  अल्लाह  की इबादत करना  और उसकी  तारीफ  करना मूर्खता  नहीं   तो और क्या  है  ?
आप लोगों  की  क्या  राय है कमेंट जरूर करिये  और इस जानकारी को  सब तक भेजिए  .

यह वो पोस्ट है जो भंडाफोड़ू के ब्लॉग पर लिखी गयी है।
जब हमने इस पोस्ट में दिए हुए अरबी टेक्स्ट को गूगल किया तो इसी ब्लॉग के जो रिजल्ट सामने आए जिसे आप यहाँ क्लिक करके देख सकते हैं पांचवे पॉइंट से आप इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं।


 आपत्ति का जवाब:

जब आप इस अरबी टेक्स्ट को पढ़ेंगे और इसका अनुवाद करेंगे तो आपको यही लगेगा जैसा इसमे लिखा है। लेकिन असल बात यह है कि यह text इस किताब में बताए गए हवाले पर नहीं है । इस टेक्स्ट की तहक़ीक़ हमने जब इनकी बताई हुई किताब से की तो उस किताब में ऐसा कुछ नहीं लिखा था।

ये इमेज है पढ़ कर देख सकते हैं।

इस पोस्ट लिखने वाले भंडाफोड़ू ने इस किताब का लिंक भी अपनी पोस्ट में दिया है। हमने उस किताब से भी इस टेक्स्ट की तहक़ीक़ की लेकिन जो हवाला भंडाफोड़ू ने दिया है उस पेज पर यह टेक्स्ट तो क्या मेराज या जिब्राईल (अलै.) का नाम तक नहीं है। और अगर ये text इस किताब में मौजूद भी हो तो इसके पीछे क्या मंशा है, इसका context क्या है, ये सनद के लिहाज से सही है या नहीं, वगैरह जैसे कई अहम बिंदु इस पोस्ट से जुड़े हैं।

भंडाफोड़ू की दी हुई किताब से इमेज
मालूम यह हुआ कि यह टेक्स्ट खुद इन्होंने बनाया है या कहीं से नकल किया है।

इसी तरह बहुत सी और भी पोस्ट इंटरनेट पर घूमती रहती है, इस बारे में हमारी जिम्मेदारी ये है कि हम हर उस बात कि तहक़ीक़ कर लें जो इस्लाम से या हमारी ज़िंदगी से जुड़ी हो।

अगर इसका कोई और हवाला है आपत्ति करता के पास तो वो हवाला पेश करें, जिससे कि इसकी सत्यता की जांच हो सके।





2 comments:

  1. वाह माशा अल्लाह भाई, गुड जॉब, ऐसे ही मुस्लिम विरोधी व्यक्तियों और लोगों को जबाव देते रहे, इनकी तो आदत है झूठ बोल के असत्य फैलाना मगर हम तथ्य, उसका बैकग्राउंड, उसकी बजाहत करके फिर
    उत्तर देते हैं। 🌹🌹🌹🌹🌹

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी भाई अल्हम्दुलिल्लाह
      जवाब देते रहेंगे इन शा अल्लाह

      Delete