आपत्ति

Monday, 8 June 2020

आपत्ति नंबर 20
क़ुरआन सूरह बक़रह 
आयत : 89
और उससे पहले काफिरों पर विजय चाहते थे जो कुछ काफिरों पर फटकार है अल्लाह की ।

आपत्ति - 20

जिस प्रकार तुम गैर धर्म वालों को काफिर कहते हो उसी प्रकार क्या वे तुम को काफिर नहीं कहते ? और वे अपने धर्म के खुदा की ओर से तुम्हें फटकारते हैं फिर कहो कौन सच्चा और कौन झूठा है ? जब ध्यान से देखते हैं तो सारे धर्म वालों में झूठ पाया जाता है । और जो सच है वह सब में समान है । ये सारे झगड़े अज्ञानता के हैं ।

आपत्ति का जवाब 

इस वाक्य में तो स्वामी जी ने फैसला ही कर दिया जिसका मतलब इन शब्दों में समझने से कोई चीज बाधक नहीं कि सत्यार्थ प्रकाश जिसमें सारे धर्मो का खंडन है बिल्कुल अज्ञानता से भरी हुई है । हम यदि यह बात कहते तो हमारे समाजी दोस्त हमसे नाराज़ होते और हमें पक्षपाती और कौन कौन सी उपाधियां प्रदान करते मगर शुक्र है कि उनके अपने बयान ने फैसला कर दिया ।

हुआ   मुद्दई  का    फेसला    अच्छा  मेरे   हक  में 
जुलैख़ा ने किया खुद पाकदामन माहे किंआं का ।

बाकी रहा गैर कौमों का काफिर कहना । हम इससे नाराज नहीं काफिर का मायना इन्कार करने के हैं । हम स्वयं कहते हैं । 

"हम तुम्हारे दीन का इन्कार करते हैं । धार्मिक कामों में | हमारी तुम्हारी मुखालिफत सदैव के लिए है जब तक तुम अकेले खुदा पर ईमान न लाओ।"

हां स्वामी जी ! जिस प्रकार आप वेद के इन्कारियों को अधर्मी और नास्तिक कहते हैं इसी प्रकार ईसाई और हिन्दू आपको इंजील और पुराणों के इन्कार करने की वजह से अधर्मी कहते हैं फिर कहिए तुम में से कौन झूठा और कौन सच्चा है ? यहां तो स्वामी जी बड़ी समझौते की पालीसी चले हैं । असल यह है कि पंडित जी के कई रंग हैं । लेकिन आप रवयं ही समझ जाइए।

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