आपत्ति नंबर 19
क़ुरआन सूरह बक़रह
आयत : 87
और अलबत्ता बेशक दी हमने मूसा को किताब और पीछे हम पैगम्बर (दूत) को लाए और दिए हमने ईसा बेटे मरयम को चमत्कार खुले और शक्ति दी हमने पाक रूह के साथ । तो क्या आया जब तुम्हारे पास साथ उस चीज़ के कि नहीं चाहते जी , तुम्हारे घमंड किया तुमने तो एक सम्प्रदाय को झुठलाया तुम ने और एक समप्रदाय को मार डालते हो ।
(आयत - 87)
आपत्ति - 19
जब कुरआन में गवाही है कि मूसा को किताब दी तो उसकी मानना मुसलमानों के लिए अनिवार्य ठहरा और जो जो इस किताब में कमी व खराबी है वे भी मुसलमानों के धर्म में आ गगी और चमत्कार की बातें सब बेकार हैं और सीधे सादे लोगों के बहकाने के वास्ते गढ़ी गयी हैं क्योंकि कुदरत के कानून और ज्ञान के विपरीत सारी बातें झूठी ही हुआ करती हैं । यदि उस समय चमत्कार थे तो अब क्यों नहीं होते । चूंकि इस समय नहीं होते इसलिए उस समय भी नहीं होते थे । इसमें तनिक भी संदेह नहीं ।
आपत्ति का जवाब
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